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उसके नाम पुलिस की गोलियां ही क्यों

पत्रकारिता और राजनीति... दोनों अंतिम सांसे ही ले रही हैं...

काटो-काटो... काटो-काटो...

ये बात दाढ़ीवाले वो बाबा भी जानते हैं

चटनी से कहीं ज़्यादा ज़रूरत रोटी की

कांग्रेस की छवि...