गांवों से वोट निकालने की तैयारी

हाथों में ये पिटारा लिए जब वित्त मंत्री के तौर पर प्रणब मुखर्जी लोकतंत्र के मंदिर में जा रहे थे... तो पूरे देश की उम्मीदें इस पिटारे से झांकती दिख रही थीं... लेकिन जब ये पिटारा सदन में खुला... और अग्रेजी में धीरे-धीरे अपने ही अंदाज़ में जब प्रणब मुखर्जी ने बोलना शुरु किया... तो सारी उम्मीदें धुंधली होती गईं... यूपीए सरकार की उपलब्धियों के बखान में शहरी आम आदमी की उम्मीदें दम तोड़ रही थीं... उसे लग रहा था... जैसे वो तो इस लोकतंत्र का हिस्सा ही नहीं है.. या कांग्रेस सरकार के लिए शहर के इन आम आदमियों से वोट नहीं निकलता...

ये बजट पूरी तरह से चुनावी है... कांग्रेस को पता है कि गांवों में रहनेवाला भारतीय ही पोलिंग बूथ की राह नापता है... और इसीलिए बजटिया पिटारे में ग्लोबल मंदी की बात तो की गई लेकिन योजनाएं सिर्फ गांवों तक सीमित रह गईं... रूरल इंडिया के लिए हज़ारों-हज़ारों करोड़ की योजनाएं लाई गई हैं... भारत निर्माण योजना के लिए 40 हज़ार नौ सौ करोड़ दिया गया है... रूरल सेनिटेशन के लिए 12 हज़ार करोड़... राषट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना के लिए 30 हज़ार एक सौ करोड़... मिड डे मिल के लिए 8000 करोड़... ग्रामीण सड़कों के लिए 4000 करोड़.. स्वच्छ पानी के लिए 7400 करोड़ रुपए...

इन योजनाओं से देश के सबसे बड़े वोट बैंक में सेंद लगाने की कोशिश की गई है... इससे पहले एनडीए सरकार ने शाइनिंग इंडिया के तहत जैसे अर्बन इंडिया को प्रोजेक्ट किया था.. और चुनावों में मुंह की खाई... लगता है कांग्रेस सरकार ने उसी से सबक लेते हुए ग्रामीण क्षेत्र से वोट बटोरने की रणनीति पर काम कर रही है...

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