20-Feb-2009
पहले बुश लड़े... अब ओबामा लड़ रहे हैं... पहले अफ़गानिस्तान में लड़े... अब पाकिस्तान की स्वात घाटी में लड़ रहे हैं... वो तालिबान है... जिसने दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति को चुनौती दे रहा है.. अमेरिका सालों से तालिबान से लड़ रहा है... तमाम रणनितियों के साथ लड़ रहा है... लेकिन तालिबान ने स्वात को पनाहगाह बना लिया है...

तालिबान से आखिरी लड़ाई लड़ने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार की मदद ली... लेकिन पाकिस्तान ने अमेरिका के पीठ में छूरा भोंक दिया... देर से सही ये बात अमेरिका को समझ में आने लगी है... अमेरिका को अब पाकिस्तान का असली चेहरा दिख रहा है... एक धोख़ेबाज़ का चेहरा..

अमेरिका को दुख है कि जिस तालिबान से लड़ने के लिए वो अपनी पूरी ताक़त झोंक रहा है... पाकिस्तान उसी तालिबान का साथ दे रहा है.. स्वात घाटी में उसे मौत का खेल खेलने की छूट दी जा रही है... पाकिस्तान सरकार की सह पर तालिबान अपने नापाक क़ायदे-क़ानून वहां के लोगों पर लाद रहा है... अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रिचटर्ड हॉलब्रुक ने हाल ही में अफगानिस्तान.. पाकिस्तान और भारत का दौरा किया था... यहां से लौटने के बाद एक टीवी को इंटरव्यू देते हुए कहा कि स्वात घाटी में जिस तरह पाकिस्ताम सरकार.. तालिबान को रियायत दे रही है.. उससे अमेरिका नाखुश है...

ये बयान पाकिस्तान को मुश्किलों में डाल सकता है... हो सकता है आतंकवाद से लड़ने के नाम पर मिल रही करोड़ो डॉलर मदद पर ग्रहण लग जाए... क्योंकि हॉलब्रुक का कहना है कि स्वात घाटी में जो कुछ हुआ है उसे लेकर वो परेशान हैं और भ्रम में हैं क्योंकि ये उत्साहजनक नहीं है...


स्वात एक ख़ूबसूरत घाटी है और हॉलब्रुक चाहते हैं कि वहां छुट्टियां बिताएं.. घूमे फिरें... कुदरत के नज़ारों का लुत्फ़ उठाएं.. लेकिन अफ़सोस है कि कुदरत के इस दोज़ख को तालिबानियों ने जहन्नुम बना दिया है.. आंकड़े बताते हैं कि स्वात घाटी की कुल 15 लाख आबादी में से 5 लाख लोग जान बचाने के लिए यहां से जा चुके हैं... और शरणार्थी बन कर कहीं और बस गए हैं... स्वात घाटी पहले प्राकृतिक सुंदरता के साथ प्राचीन बौध्द अवशेषों के लिए प्रसिध्द थी...


लेकिन अब ये तालिबान का पनाहगाह बनी हुई है... और हॉलब्रुक इसे भारत.. अफगानिस्तान.. पाकिस्तान और अमेरिका के लिए एक ख़तरा मानते हैं...

निवेदन

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